Sunday, 8 September 2013

“INDIAN OIL-PRIDE OF THE NATION”

Let’s remember the story, Of warmth & glory ,
Of struggle & fight, Of sweat & pride.
Way back in 1959, the stone was laid,
For the way ahead.
A name was given, resembling the nation,
Foundation was laid, for pride of generations.
Our predecessor’s have strived Day and night,
To make us self reliant, shining bright  .
A mountain task to compete those,
Who lead the market around the globe.
We succeeded thought sheer conviction
To provide our nation energy protection.

With the turn of the era,
Came the age of decentralization.
the rocking winds tried to jolt,
we stood strong with our firm foundation hold.    

With another decade gone,
Now it’s our turn to draw the future,
To take the glory ahead and pass it on,
To carry the service of the nation to another heights.
To once more bring the name in lime light,
Making “Indian Oil”- Shining bright.

“अब सूरज निकालना चाहिए”

है अंधेरा तो बहुत,
अब सूरज निकलना चाहिए ।
मन के शिथिलता को काट,
एक ऊर्जा निकलनी चाहिए ।
सहते रहोगे कबतक,
उस हर अत्याचार को।
जिसके विरुद्ध हम सबकी,
एकजूट आवाज निकलनी चाहिए।
हर ओर घनघोर अंधेरा है,
फैल रहा भ्रस्टाचार का घेरा है।
हो रहा नारी का शोषण है,
नवजात का हो रहा न पोषण है।
जिसे चुना वही लूट रहे,
फिर भी हम सब मूक देख रहे।
हिंसा न हो, ईर्ष्या न हो,
ये है सबकी प्रार्थना।
पर हे ईश्वर करो कृपा,
न छिन जाए सबकी चेतना।
मूक होकर सब बस खड़े रहे,
इस देश को लुटता देख रहे।
जो लगे अपने घर मे आग,
वो हाहाकार मचाते है।
जो हो दूजे का तो फिर वो,
पहले अपनी जान बचते है।
समय नहीं वो दूर बहुत,
जब सब्र के बांध भी टूटेंगे।
संकट जब घर आएगा,
तो अपने- आप से रूठेंगे।
धैर्य सही पर इतना नहीं,
की लुट जाए मानवता का नाम।
और हम सब मूक बने,
कर रहे हो कहीं विश्राम।

Wednesday, 3 July 2013

"उस रंग का न कोई नाम हो"

तू श्वेत नहीं तू श्याम नहीं,
उस रंग का कोई नाम नहीं ।
इस नश्वर संसार मे जीवन,
जैसे रेत मे कोई उपवन ।
इस जीवन की रीत निराली,
कोयल भी होती है काली ।
पर तेरा ये संदेश,
समझ सके न कोई भेष ।
भाई पर भाई टूट रहे है,
प्रेम के बंधन छूट रहे है ।
अपने- आप से डरते है,
लहू के मोल भी सस्ते हैं ।
अब तो इस संसार मे जीवन,
जैसे मरूँ मे बहता पवन ।
अब तो मेरे पालनहार,
करदो इस जीवन का उद्धार ।
प्रेम भरी हर डाली हो,
जीवन मे फिर खुशहाली हो ।
कोई श्वेत हो न श्याम हो,

उस रंग का न कोई नाम हो।

Friday, 23 September 2011

"एक नयी सुबह"


एक नयी सुबह, नयी उमंग, 
आई सूर्य किरणों के संग |


रात घने अंधियारे को काट,
उर्जा जो दे सबको मात |


बहने लगी रघों में आज,
ज्यों सर पर मुकुट लगे हो ताज |


नए आरम्भ का हुआ आघाज,
अब तो कुछ करना है आज |


अब रोके न रुकने वाले,
आगे है बढ़ते जाना |


इस नयी सुबह का नया कल,
हमको है  लिखकर जाना |


पथ पर पत्थर हो अनेक,
हमको है न घबराना |


मुस्किल आये, विपदा छाए,
आगे है बढ़ते जाना |


जीवन एक - यह है अनमोल,
इसका नहीं है कोई मोल |


लाखों आये, कर न पाए,
कुछ एक ऐसा काम |


जो इस अनमोल जीवन को,
दे सके एक नया नाम |


अब तो बस कुछ कर जाना है,
इतिहास नया बनाना है |


इस अनमोल जीवन का,
हम सबको ऋण चुकाना है | 

“FLYING HIGH IN THE SKY"


Flying high in the sky,
The pride of the nation,
Of generation and generations.
Filled with honour and glory in mind,
Stands the flag of the nation,
Known for its integration.
Back in time, in a gloomy night,
Roared in the sky, shining bright.
The mark of a nation, 
Beginning of an era,
Time stood still for the history in making.
Let’s not forget the glorious mile,
Which some walked to give us a smile.
A price was paid,
To achieve this fate.
They saw a dream and fought for it,
To give us a bread with independence in it.
This air of independence,
Reminds of its dependence,
On shoulders of every genartion,
Who carry this obligation, 
To take this nation on a journey ahead,
To take an extra stride,
to add to country’s pride.
Let’s join our hands and take this pledge,
To take our nation beyond the edge.
  

Thursday, 22 September 2011

"तू मेरी मंजिल" (A Poem cum Song)



आँखों से मंजिल खो गयी है,
दिल के अरमान सो गए हैं |


यूँ मुहे तडपाओ न तू ,
इस कदर तरसाओ न तू |


खुद ही टूट कर बह रहा हूँ,
बिखरे टुकड़े चुन रहा हूँ |


तू भी जो मुझे छोड़ जाये,
जीवन ये कैसा जिया न जाये |


आँखों से मंजिल खो गयी है,
दिल के अरमान सो गए हैं |


हर गली बस ढूंड रहा हूँ,
तेरी सूरत या तेरी सीरत |


तेरी पल्खों की वो छाओं,
तेरी बाँहों की सिराहों |


हर तरफ बस तू ही तू है,
मेरे जीवन की तू रूह है |


मेरे सपनो की हकीकत,
तू ही मेरे जीने की ताकत |


अब तू है मंजिल, तू है अरमान,
तेरे बिना न जीना मरना |


तू हकीकत तू जरूरत,
तू है मेरे दिल की चाहत |


हर घड़ी ये जग है कहता,
मै हूँ पागल और वो हँसता |


मैं कहूँ बस तू है अपना,
न कोई ख्वाहिस न कोई सपना |


तू मेरी मंजिल, तू मेरा अरमान,
तेरे बिना न जीना मरना |


हात पकड़ ले, साथ दे मेरा,
जीवन में नया मोड़ है तेरा |


सोच न अब, और न तरसा,
मेरे साथी, तू तो साथ निभा |


तू मेरी मंजिल, तू मेरा अरमान,
तेरे बिना न जीना मरना |




Wednesday, 21 September 2011

"दो शब्द उनके नाम"


दो शब्द उनके नाम,
जिसने बनाई यह दुनिया तमाम |

तेरी यह रचना अपरम्पार,
जीवन से बड़ा न कोई उपहार |

इसका न कोई मोल,
चाहे जिस कसौटी पर तोल |

कोटि कोटि यह है अनमोल, 
भूल रहे सब इसका मोल |    

नमन तुझे, यह जीवन तेरा, 
अर्पण करूँ क्या, सब है तेरा |

नत मस्तक चरणों में पड़ा, 
हूँ इसी आशा उम्मीद में खड़ा |

इस नश्वर संसार से,
कब उद्धार दिलाओगे |

आज तेरी इस रचना में,
रात घना अँधियारा है |

अगली सुबह की उजली किरण,
क्या वक़्त रहते दिखलाओगे |

तेरी इस अनमोल भेंट का,
हम कर न सके सम्मान |

हे ईश्वर आज फिर,
धरती का करें कल्याण |

भक्ति न मिटे, शक्ति न घटे,
दे दे बस इतना ज्ञान |

प्यार बढे, संसार फले,
कोई न रहे सपाट, वीरान |