दो शब्द उनके नाम,
जिसने बनाई यह दुनिया तमाम |
तेरी यह रचना अपरम्पार,
जीवन से बड़ा न कोई उपहार |
इसका न कोई मोल,
चाहे जिस कसौटी पर तोल |
कोटि कोटि यह है अनमोल,
भूल रहे सब इसका मोल |
नमन तुझे, यह जीवन तेरा,
अर्पण करूँ क्या, सब है तेरा |
नत मस्तक चरणों में पड़ा,
हूँ इसी आशा उम्मीद में खड़ा |
इस नश्वर संसार से,
कब उद्धार दिलाओगे |
आज तेरी इस रचना में,
रात घना अँधियारा है |
अगली सुबह की उजली किरण,
क्या वक़्त रहते दिखलाओगे |
तेरी इस अनमोल भेंट का,
हम कर न सके सम्मान |
हे ईश्वर आज फिर,
धरती का करें कल्याण |
भक्ति न मिटे, शक्ति न घटे,
दे दे बस इतना ज्ञान |
प्यार बढे, संसार फले,
कोई न रहे सपाट, वीरान |
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