Wednesday, 21 September 2011

"दो शब्द उनके नाम"


दो शब्द उनके नाम,
जिसने बनाई यह दुनिया तमाम |

तेरी यह रचना अपरम्पार,
जीवन से बड़ा न कोई उपहार |

इसका न कोई मोल,
चाहे जिस कसौटी पर तोल |

कोटि कोटि यह है अनमोल, 
भूल रहे सब इसका मोल |    

नमन तुझे, यह जीवन तेरा, 
अर्पण करूँ क्या, सब है तेरा |

नत मस्तक चरणों में पड़ा, 
हूँ इसी आशा उम्मीद में खड़ा |

इस नश्वर संसार से,
कब उद्धार दिलाओगे |

आज तेरी इस रचना में,
रात घना अँधियारा है |

अगली सुबह की उजली किरण,
क्या वक़्त रहते दिखलाओगे |

तेरी इस अनमोल भेंट का,
हम कर न सके सम्मान |

हे ईश्वर आज फिर,
धरती का करें कल्याण |

भक्ति न मिटे, शक्ति न घटे,
दे दे बस इतना ज्ञान |

प्यार बढे, संसार फले,
कोई न रहे सपाट, वीरान |

No comments:

Post a Comment