एक नयी सुबह, नयी उमंग,
आई सूर्य किरणों के संग |
रात घने अंधियारे को काट,
उर्जा जो दे सबको मात |
बहने लगी रघों में आज,
ज्यों सर पर मुकुट लगे हो ताज |
नए आरम्भ का हुआ आघाज,
अब तो कुछ करना है आज |
अब रोके न रुकने वाले,
आगे है बढ़ते जाना |
इस नयी सुबह का नया कल,
हमको है लिखकर जाना |
पथ पर पत्थर हो अनेक,
हमको है न घबराना |
मुस्किल आये, विपदा छाए,
आगे है बढ़ते जाना |
जीवन एक - यह है अनमोल,
इसका नहीं है कोई मोल |
लाखों आये, कर न पाए,
कुछ एक ऐसा काम |
जो इस अनमोल जीवन को,
दे सके एक नया नाम |
अब तो बस कुछ कर जाना है,
इतिहास नया बनाना है |
इस अनमोल जीवन का,
हम सबको ऋण चुकाना है |
Kutch tammana thi aisi, kutch khwahisein !
ReplyDeleteMian bhi prakta kar sakta, apne bhaw aise !!!
Par na shab mila, na mila maukaye ibadat!
Bas banake rah gayi ek un-kahi hasrat !!!
Par ye panktiya likhte likhte aisa lga ki phir kahoon .....
एक नयी सुबह, नयी उमंग,
आई सूर्य किरणों के संग |
नए आरम्भ का हुआ आघाज,
अब तो कुछ करना है आज |
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Bahut hi sundar bhawna hai aur meri is khsetra ki alp smajh ye kahti hai ki bhawan ki abhivyakti utni hi ssakat hai . Bhawagwan aapko aur barkat de.
Keep going ..............