Friday, 23 September 2011

"एक नयी सुबह"


एक नयी सुबह, नयी उमंग, 
आई सूर्य किरणों के संग |


रात घने अंधियारे को काट,
उर्जा जो दे सबको मात |


बहने लगी रघों में आज,
ज्यों सर पर मुकुट लगे हो ताज |


नए आरम्भ का हुआ आघाज,
अब तो कुछ करना है आज |


अब रोके न रुकने वाले,
आगे है बढ़ते जाना |


इस नयी सुबह का नया कल,
हमको है  लिखकर जाना |


पथ पर पत्थर हो अनेक,
हमको है न घबराना |


मुस्किल आये, विपदा छाए,
आगे है बढ़ते जाना |


जीवन एक - यह है अनमोल,
इसका नहीं है कोई मोल |


लाखों आये, कर न पाए,
कुछ एक ऐसा काम |


जो इस अनमोल जीवन को,
दे सके एक नया नाम |


अब तो बस कुछ कर जाना है,
इतिहास नया बनाना है |


इस अनमोल जीवन का,
हम सबको ऋण चुकाना है | 

1 comment:

  1. Kutch tammana thi aisi, kutch khwahisein !
    Mian bhi prakta kar sakta, apne bhaw aise !!!

    Par na shab mila, na mila maukaye ibadat!
    Bas banake rah gayi ek un-kahi hasrat !!!

    Par ye panktiya likhte likhte aisa lga ki phir kahoon .....

    एक नयी सुबह, नयी उमंग,
    आई सूर्य किरणों के संग |

    नए आरम्भ का हुआ आघाज,
    अब तो कुछ करना है आज |

    ...........................

    Bahut hi sundar bhawna hai aur meri is khsetra ki alp smajh ye kahti hai ki bhawan ki abhivyakti utni hi ssakat hai . Bhawagwan aapko aur barkat de.

    Keep going ..............

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