Wednesday, 3 July 2013

"उस रंग का न कोई नाम हो"

तू श्वेत नहीं तू श्याम नहीं,
उस रंग का कोई नाम नहीं ।
इस नश्वर संसार मे जीवन,
जैसे रेत मे कोई उपवन ।
इस जीवन की रीत निराली,
कोयल भी होती है काली ।
पर तेरा ये संदेश,
समझ सके न कोई भेष ।
भाई पर भाई टूट रहे है,
प्रेम के बंधन छूट रहे है ।
अपने- आप से डरते है,
लहू के मोल भी सस्ते हैं ।
अब तो इस संसार मे जीवन,
जैसे मरूँ मे बहता पवन ।
अब तो मेरे पालनहार,
करदो इस जीवन का उद्धार ।
प्रेम भरी हर डाली हो,
जीवन मे फिर खुशहाली हो ।
कोई श्वेत हो न श्याम हो,

उस रंग का न कोई नाम हो।

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