Thursday, 22 September 2011

"तू मेरी मंजिल" (A Poem cum Song)



आँखों से मंजिल खो गयी है,
दिल के अरमान सो गए हैं |


यूँ मुहे तडपाओ न तू ,
इस कदर तरसाओ न तू |


खुद ही टूट कर बह रहा हूँ,
बिखरे टुकड़े चुन रहा हूँ |


तू भी जो मुझे छोड़ जाये,
जीवन ये कैसा जिया न जाये |


आँखों से मंजिल खो गयी है,
दिल के अरमान सो गए हैं |


हर गली बस ढूंड रहा हूँ,
तेरी सूरत या तेरी सीरत |


तेरी पल्खों की वो छाओं,
तेरी बाँहों की सिराहों |


हर तरफ बस तू ही तू है,
मेरे जीवन की तू रूह है |


मेरे सपनो की हकीकत,
तू ही मेरे जीने की ताकत |


अब तू है मंजिल, तू है अरमान,
तेरे बिना न जीना मरना |


तू हकीकत तू जरूरत,
तू है मेरे दिल की चाहत |


हर घड़ी ये जग है कहता,
मै हूँ पागल और वो हँसता |


मैं कहूँ बस तू है अपना,
न कोई ख्वाहिस न कोई सपना |


तू मेरी मंजिल, तू मेरा अरमान,
तेरे बिना न जीना मरना |


हात पकड़ ले, साथ दे मेरा,
जीवन में नया मोड़ है तेरा |


सोच न अब, और न तरसा,
मेरे साथी, तू तो साथ निभा |


तू मेरी मंजिल, तू मेरा अरमान,
तेरे बिना न जीना मरना |




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